Friday, November 20, 2015

हमारी अधुरी कहानी ....

Inspired by the title song of the movie हमारी अधुरी कहानी. The first two lines are picked as is to maintain inspiration.
________________________________________

आसमां से जमीं, ये जरूरी नहीं, जा मिले .... जा मिले
इश्क सच्चा वही, जिसको मिलती नही, मंजिलें ... मंजिलें

मै अकेला नहीं, संग सदा तू मेरे, हर कहीं ... हर कहीं
साथ है तू मगर, हाथ मे हाथ वो, है नहीं ... है नहीँ
तू मेरी बेबसी, तू ही मेरी खुशी, जान ले ... जान ले
मुस्कुराती रहे, ये दुआ वो मेरी, मान ले ... मान ले
कुछ ऐसी अधुरी कहानी ... हमारी अधुरी कहानी ....
हमारी अधुरी कहानी .... हमारी अधुरी कहानी ....


धडकने थम गई, फिरभी चलती रही, दासतां... दासतां
इंतजार तेरा, खत्म कर ना सका, रासता ... रासता
खाक होके यही, रूह तुझसे मेरी, आ मिले ... आ मिले
इश्क सच्चा यही, इसको मिल ही गई, मंजिलें ... मंजिलें
कुछ ऐसी अधुरी कहानी ... हमारी अधुरी कहानी ....
हमारी अधुरी कहानी .... हमारी अधुरी कहानी ....


- कोण?

Tuesday, October 27, 2015

तन्हां आवारगी

मुळचा एप्रिल २४ २००० चा एक शब्द संग्रह …
(धन्यवाद नितिन मण्डवाले for sharing back)

--------------------------------------------------------------------
चांद तनहा, याद तनहा, तनहा जिंदगी
तनहा दिल, तनहा धड़कन, तनहा है ख़ामोशी
खाली आँखे, सूखे आंसू, दिल में है आग सी सुलगी
अंजान डगर, बेचैन नज़र, हर शक्स अजनबी

अकेला इंतज़ार, अनजान सा डर, चुपचाप खामोशी
दबी सी सिसक, बढती उलझन, चाह कहीं राह ही में रुकी
सुने सपने, भीगी पलकें,  एक दास्ताँ अनसुनी
खोई मंझिल, सुनसान राहें,  मैं भटकता हर कहीं

एक ही राहत, तेरा इंतज़ार, आँखे तेरे दर पर टिकी
अटकी सांस, तेरा एहसास, जान जैसे पलकों में रुकी
फैले हाथ, अकड़ता बदन, दिल की धड़कन भी थकी
तेरी आरजू, तेरा दीदार, इसी खातिर जैसे जां हो बाकी

मेरी ख्वाहिश, मेरी आबरू, मेरी जिंदगी
मेरा खुदा, मेरी इबादत, मेरी बंदगी
तेरा चेहरा, तेरी मुस्कान, तेरी सादगी
तेरा इंतज़ार कराती, थकी थकी सी मेरी आवारगी

- कोण?

Sunday, February 8, 2015

वह ... कौन?

1996 जून 17 ला लिहीलेली काॅलेज लाईफ मधली ही कविता.

बर्याच वर्षांनी फडताळात ते जुन्या कवितांचं गाठोडं गवसलंय. तर त्या गंगोत्री ला डिजिटाईझ करण्याचा हा खटाटोप.
---------------------------------------------------------------

एक तस्वीरसी रहती है आंखोमे
कुछ अनदेखी अनजानीसी,
के सोचता हूं 'इसे देखा है कहीं'
कुछ जानी सी पहचानी सी !!

            तडपाती है मुझे वह हंसहंसके
            सताती और लुभाती हैँ,
            मै जितना उसे भुलाता हूं
            उतनीही याद वह आती हैं !!

जब पलकें मूंदे सोचता हूं
वह सामने खडी सी लगती हैं,
दिदारको पलके खोलूं तो
वह अंधेरेसे बिलगती हैं !!

            कहीं खो ना दूं उसे ख्वाबोंमे
            मै मन ही मन मे डरता हूं,
            बस इसीलिए ही रहरहकर
            उसे अक्सर याद मै करता हूं !!

वह कहां मिलेगी पता नहीं
कुछ पगली और दिवानी सी,
के सोचता हूं 'इसे देखा है कहीं'
कुछ जानी सी पहचानी सी ....!!

- कोण?